Category: Poetry by the Pied Paiper

An Ode to Childhood – बचपन मेरा बना रहे

पैरों मैं पंख लिए  जब,  दौड़े चले वह नन्हे पगनैना देख पुलकित होए, सुन्दर बने उनसे यह जग ज़मीं पर टिके न टिकाये, वह नन्हे पैरों के दौड़ते निशाँचंचल पग को चूमना चाहें, इस व्याकुल […]